छत्तीसगढ़ सर्वआदिवासी समाज जिला इकाई कोरबा 23 सूत्री माँग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन…..बोले पिछले पांच वर्षों से ठगा जा रहा अब होगा उग्र आंदोलन…

रूपेश कुमार/कोरबा/संवाद36न्यूज

कोरबा/29/05/2023 :
सर्व आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ में अपने संवैधानिक एवं नैसर्गिक अधिकारों की रक्षा तथा ज्वलंत समस्याओं को लेकर पिछले कई वर्षों से शासन-प्रशासन को निवेदन किये, कोई सकारात्मक पहल सरकार के द्वारा नहीं होने से अपनी बात रखने के लिए लोकतांत्रिक तरीके से दिनांक 19 जुलाई 2021 को जिला ब्लॉक स्तरीय धरना, प्रदर्शन माह सितम्बर 2021 में बंद एवं चक्काजाम किये, प्रदेश स्तरीय महाबंद भी किये उसके उपरांत भी सरकार, प्रशासन एवं जिला स्तर पर भी कोई पहल नहीं किया गया, 14 मार्च 2022 को हुंकार रैली एवं विधानसभा घेराव, 32 प्रतिशत के लिए जिला, ब्लाक में धरना उपयंत संभाग स्तरीय धरना प्रदर्शन 15 नवम्बर, 2022 किया गया। आज भी इस प्रदेश के बहुसंख्यक आदिवासी समाज हताश एवं नाराज है। पूर्व में 19 फरवरी, 2018 को रावणभाठा मैदान रायपुर में सर्वआदिवासी समाज के संवैधानिक एवं विभिन्न मांगों के 21 सूत्रीय मांग पत्र पर सभी समाज प्रमुख एवं वर्तमान सरकार के अधिकतर विधायक और मंत्रियों का भी हस्ताक्षर है, न पूर्व के सरकार, न ही वर्तमान के सरकार द्वारा जिसमें बहुसंख्यक आदिवासी विधायक है इसके बावजूद आदिवासी समाज के किसी भी प्रावधानित संवैधानिक अधिकार, मांग एवं प्रताड़ना में कोई भी निदान नहीं हुआ है।

सर्व आदिवासी समाज का शासन के प्रति नाराजगी का प्रमुख सवैधानिक एवं नैसर्गिक अधिकार तथा ज्वलंत समस्याएं निम्नानुसार है :-
◼️(1) संवैधानिक प्रावधान के तहत आदिवासी समाज का 32 प्रतिशत आरक्षण नहीं मिल रहा है।

◼️(2) जिला-सुकमा के ग्राम-सिलेगर में दोषियों पर कार्यवाही एवं निर्दोष मृतक ग्रामीणों के परिजन को उचित मुआवजा एडसमेटा सागुड़ा, तामेंटला घटनाओं के न्यायिक जांच में सभी एनकाउंटर फर्जी पाया गया है दोषी अधिकारी, कर्मचारी पर तत्काल दण्डात्मक कार्यवाही एवं मृतक प्रभावित के परिवार को उचित मुआवजा। बस्तर में नक्सल समस्या का स्थायी समाधान हेतु शासन स्तर पर पहल करे।

◼️(3) छत्तीसगढ़ प्रदेश में ऐसा कानून का नियम बनाया गया है उसमें संशोधन कर ग्रामसभा को पूर्ण अधिकार दिया जाये।

◼️(4) छ.ग. में विभिन्न शासकीय पदों के पदोन्नति में आरक्षण लागू करें।

◼️(5) शासकीय नौकरी में बैकलॉग एवं नई भर्तियों पर आरक्षण रोस्टर लागू किया जाये। पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी भर्ती में शत-प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाये।

◼️(6) पांचवी अनुसूची क्षेत्र में गैर संवैधानिक रूप से बनाये गये नगर पंचायतों, नगर पालिक निगम को वापस ग्राम सभा बनाया जाये।

◼️(7) राज्य में समस्त वन ग्रामों को राजस्व ग्राम बनाये जाये एवं वहां निवासरत किसानों को राजस्व ग्राम की तरह अधिकार एवं सुविधा दी जाए। सीतानदी अभ्यारण्य में प्रभावित वनग्राम / ग्राम में वनोपज संग्रहण और विक्रय का अधिकार दिया जायें।

◼️(8) मात्रात्मक त्रुटि में सुधार किया जाकर जाति प्रमाण पत्र ( सामाजिक पारस्थितिक प्रमाणीकरण पत्र) जारी करे। फर्जी जाति प्रमाण पत्र प्रकरण पर दोषियों पर शीघ्र कार्यवाही हो।

◼️(9) प्रदेश के 5वीं अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा की सहमति के बिना किये गये भूमि अधिग्रहण रद्द करें एवं बिना ग्रामसभा के सहमति के किसी प्रकार का कार्य किया जाये एवं शासकीय एवं सार्वजनिक उपक्रम के अलावा किसी भी कार्य की सहमति न दी जायें। बस्तर में नगस्तार विनिवेश को रोका जाये तथा हसदेव कोल ब्लाक खनन को भी रोका जाये।

◼️(10) प्रदेश में उनके लिए जमीन अधिगन को आए आवश्यक होने पर लोग में लेकर जमीन मालिक को शेयर होल्डर बनाए जाए। गौण खनिज का पूरा अधिकार ग्राम सभा को दिया जाये।

◼️(11) पांचवी अनुसूची क्षेत्र कांकर जिला के 14 ग्राम पंचायत में सरपंच पद को अनारक्षित किया गया है उसे पुनः आदिवासी के लिए आरक्षित किया जाये।

◼️(12) अनुसूचित जाति एवं जनजाति का आरक्षण एवं सुविधाएं जाति पर आधारित है (आर्टिकल 16 ) अतः केन्द्र सरकार द्वारा छात्रवृत्ति योजना में आदिवासियों के लिए आय सीमा में 2.50 लाख निर्धारित है को समाप्त किया जाये।

◼️(13) आदिवासी सलाहकार परिषद का गठन नियमानुसार किया जाये, इस परिषद का अध्यक्ष आदिवासी सलाहकार परिषद के सदस्यों में से ही होना चाहिए। आदिवासी सलाहकार परिषद का एक कार्यालय होना चाहिए जहां अ.ज.जा. वर्ग के लोग अपनी समस्या एवं विचार रख सकें। आदिवासी को ही अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया जाये।

◼️(14) ..प्रदेश में विधिसम्मत बसाये गए विदेशी शरणार्थियों के अलावा अवैध रूप से आदिवासी क्षेत्रों में रह रहे विदेशी घुसपैठियों जिनको संख्या कई हजारों में है, उनका निष्पक्ष जांचकर इसे आदिवासी क्षेत्रों से बाहर भेजा जावे।

◼️(15) बस्तर संभाग में हजारों बेकसूर आदिवासियों को नक्सली या उनका सहयोगी बताकर नक्सल धारा लागू कर जेलों में बिना कारण के बन्दी बनाकर रखा गया है ऐसे निरपराध आदिवासियों को निष्पक्ष जांच कर निःशर्त जेलों से रिहाई किया जाये तथा फर्जी तरीके से मारे गए आदिवासियों के परिवारों को रू. 25 लाख मुआवजा दिया जाये।
सलवा जुडूम में 600 जड़े गांव को पुनः बसाया जाये और जो अन्य क्षेत्रों / प्रांत में गये हो उन्हें वापस लाया जाये।

◼️(16) अभ्यारण्य और टाईगर रिजर्व, बांध या सरकारी उपक्रम के नाम पर आदिवासियों को बेदखल किया जा रहा है जिसके तहत (अ) सीतानदी अभ्यारण्य में 32 गांव, बारनवापारा अभ्यारण्य में 6 गांव तथा उदंती अभ्यारण्य एवं अचानकमार अभ्यारण्य में अनेको गांव उजाड़े जा रहे है। धमतरी के गंगरेल सौदूर दुधावा जैसे बांधों से विस्थापितों को मय व्याज मुआवजा तत्काल दिया जाय। अतः जब तक इन बस्तियों के आदिवासी के परिवारों तथा उनके पालतू जानवर, नदी नाला, बोध, जंगल आदि का पुनर्वास एवं पुर्नव्यवस्थापन नहीं कर दिया जाता तब तक इन पस्तियों को न उजाड़ा जाए इसके लिए समाज विरोध करता है। (स) सरगुजा संभाग में प्रस्तावित समस्तअभ्यारण्य टाइगर रिजर्व के प्रस्ताव पर तत्काल रोक लगाया जावे।

◼️(17) कबीरधाम जिले के लगभग 80-90 ग्राम पंचायत को अधिसूचित क्षेत्र घोषित किया जाये रंगा खार ब्लॉक नया बनाया जा रहा है उसको अनुसूचित क्षेत्र घोषित किया जाये।

◼️(18) अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण 1989 के प्रावधान होते हुए भी जमीन कब्जा मामलों पर एफ.आई.आर. दर्ज नहीं किया जाता है तथा जिला न्यायालय भी कार्यवाही करने से इंकार करते है। अतः इस पर तत्काल कार्यवाही किया जाये।

◼️(19) आदिवासी धार्मिक, पारम्परिक और सांस्कृतिक स्थलों जैसे भोरमदेव के देखरेख और सेवा अर्जी के लिए बनाये गये समिति या ट्रस्ट में आदिवासी समाज के लोगों को ही रखा जाए। अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी पारंपरिक, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों में ट्रस्ट न बनाए जायें।

◼️(20) आदिवासियों की घटती जनसंख्या विशेषकर अति पिछड़ी जनजाति के मद्देनजर उसकी संख्या के नियंत्रण को बढावा देने वाली सरकारी योजनाओं जैसे “परिवार नियोजन” को अवधारणा से परे समस्त जनजातियों को वंश वृद्धि में संख्या की बाध्यता से बाहर रहने की पात्रता में छूट दिया जाये (21) वन अधिकार कानून 2006 के तहत सभी दावेदारों को उनकी पूर्ण काबिज जमीन के व्यक्तिगत वनाधिकारों को मान्यता दी जाये।

◼️(22) आदिवासी समाज की लड़की से अन्य जाति / समाज में शादी होने
पर इनके नाम की जमीन जायदाद वापस किया जाए।

◼️(23) आदिवासियों पर उत्पीडन जैसे जमीन का हस्तांतरण, महिला एवं बच्चों पर अत्याचार, हत्या, जातिगत अपमान पर तत्काल कार्यवाही करे।उपरोक्त संवैधानिक अधिकार, मांग, प्रताड़ना के लिए सर्व आदिवासी पर(रूढ़िजन्य परंपरा पर आधारित) लगातार ब्लॉक से लेकर राज्यस्तरीय ज्ञापन, धरना प्रदर्शन चक्का जाम व विधानसभा किये लेकिन शासन-प्रशासन के द्वारा कोई भी पहल नहीं किया गया। सत्ता में 30 विधायक होने के बाद भी कोई निदान नहीं हुआ न हो विपक्ष के द्वारा इन मुद्दों पर पार्टी फोरम या विधानसभा में कोई ठोस पहल किए गए आदिवासी समाज अपने इन बातों एवं स्थानीय मुद्दों को लेकर जनजागृति गांव गांव एवं मोहल्ला पारा तक पहुंचाएंगी और शासन-प्रशासन को अपने अस्तित्व के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ेगी।
ज्ञापन देने के लिए युवा प्रभाव से केसी कंवर जिलाध्यक्ष ,प्रकाशकोर्राम जिला महासचिव, गणेश उईके जिला कोषाध्यक्ष ,चंद्रपाल कंवर पौड़ी उपरोंडा ब्लॉक अध्यक्ष ,इंद्रपाल नेटी कटघोरा ब्लॉक अध्यक्ष, दिनेश कुमार कंवर ब्लाक महासचिव, सुशील कोर्राम कटघोरा कोषाध्यक्ष, महेंद्र कंवर, सहदेव कंवर , गोविंद कंवर, रवि सिंह कंवर व प्रदेश सक्रिय सदस्य महिपाल सिंह कंवर जी उपस्थित रहें।

MAYA KANWAR
Author: MAYA KANWAR

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