संवाद36न्यूज/कोरबा
हरदीबजार: हसदेव के जंगलों में कोल खनन करने कई सौ एकड़ जमीन की हरी भरी पेड़ों को काटने के विरोध में सरगुजा क्षेत्र सहित पूरे छत्तीसगढ़ में एक जन आंदोलन शुरू हो चुका है। कहा जाता है हसदेव अरण्य वन क्षेत्र मध्य एशिया की वह धरती है जिसे सरकार की कई एजेंसियों द्वारा NO GO जोन क्षेत्र घोषित किया है। मध्य एशिया का फेफड़ा भी कहा जाता है। इस जंगल के वजह से मानसून के समय मे आस के क्षेत्रों में बारिश होती है।साथ यह हाथी सहित लाखों जीव जंतुओं का प्राकृतिक निवास क्षेत्र भी है। लेकिन विकास के नाम पर हसदेव जंगलों की अंधाधुंध पेड़ो की कटाई से क्षेत्र की क्लाइमेट चेंज होने कारण बारिश कम होने सहित जंगली जानवरों जिनमें हाथीयों के लिए सबसे ज्यादा नुकसान होगा और हाथी मानव द्वंद्व बढ़ने की सम्भवना है। प्रकृति को होने वाली इस हानि से चिंतित सरगुजा क्षेत्र के मूलनिवासी जिनमें आदिवासीयों की निवास क्षेत्र संस्कृति पूरी तरह संकट में दिखाई दे रहे हैं। इससे विचलित छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में पर्यावरण प्रेमियों में चिंता जताया है। और विरोध में सोसियल मीडिया सहित X(ट्वीटर) में भी हसदेव आंदोलन ट्रेंडिंग में दिखाई दे रही है। इसी तरह हरदीबाजार में मड़ाई मेला चलरहा है जंहा लोगों हसदेव अरण्य क्षेत्र की जंगल में पेड़ों की कटाई से होने वाले भविष्य में नुकसान को बता कर सर्वआदिवासी समाज कोरबा युवा प्रभाग एवं क्षेत्र के पर्यवारण प्रेमियों ने बैनर तख्ती के साथ हसदेव बचाओ आंदोलन के लिये लोगों से समर्थन जुटाया और मड़ाई मेला में आए लोगों ने इस आंदोलन को अपार समर्थन मिला। जनजागरूकता अभियान में सर्वआदिवासी समाजके जिला अध्यक्ष केशी कँवर,प्रकाश कोर्राम, गणेश उईके, बृज कुंवर(सरपंच आमगांव),विजय प्रभात,हेमंत नेटी,नवरत्न कंवर,अजय एवं मेले में आये लोगों ने बैनर तख्तियां पकड़ कर विरोध किया।

















